रविवार, 6 सितंबर 2009

सन्नाटों में संगीत बरबस ही उपज जाता है..........


सन्नाटों में संगीत बरबस ही उपज जाता है,


जो रात लम्बी होने लगे और कोई रास्ता न हो।


सांसो को कुछ मकसद मिल ही जाता है,


जो तलाश लम्बी हो और मकसद की परिभाषा न हो।



कल्पनाओं के भंवर में बह जाता है मन बार-बार,


जो जिंदगी के आकाश में अवकाश की प्रत्याशा न हो।


बन जाते है मधुर-सुमधुर गीत यु ही,


जो एकमुश्त जानलेवा दर्द की आशा न हो.

2 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

bahut khub

ktheLeo (कुश शर्मा) ने कहा…

Sunder hai vichar aur shabd vinyaas bhi!