
सन्नाटों में संगीत बरबस ही उपज जाता है,
जो रात लम्बी होने लगे और कोई रास्ता न हो।
सांसो को कुछ मकसद मिल ही जाता है,
जो तलाश लम्बी हो और मकसद की परिभाषा न हो।
कल्पनाओं के भंवर में बह जाता है मन बार-बार,
जो जिंदगी के आकाश में अवकाश की प्रत्याशा न हो।
बन जाते है मधुर-सुमधुर गीत यु ही,
जो एकमुश्त जानलेवा दर्द की आशा न हो.
2 टिप्पणियां:
bahut khub
Sunder hai vichar aur shabd vinyaas bhi!
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