
कहानी कुछ पाने से शुरू हो तो बेहतर है ...
जो मुझे जानते हैं, आज वास्ता उनसे है।
बचपन कब चला गया ठीक ठीक पता नही. जवानी की दस्तक हुई ...ढेर से सपने , निराधार उम्मीदे और ऐसी ही कुछ और चीजे जेहन में जोर मारने लगी। जल्द ही यथार्थ के कड़े धरातल का स्पर्श हुआ । पहले चखे हुऐ खट्टे बेर जानलेवा दर्द बन गये ।
तकलीफ में हर किसी को रस्म की तरह कुछ सहारा मिल ही जाता है ...मेरी झुलसती उम्मीदों को मानो बारिश (वर्षा) ने तर कर दिया। उस सहारे ने मुझे कोमल कर दिया और मेरे धरातल को और भी कठोर।
शायद गलती मेरी थी ...मैंने जिसे झोका समझा वो तेज आंधी थी जिसे तबाही कर जाना ही था, वो गई और मन की वो गर्द भी उड़ा ले गयी जो मेरे जीवन में लम्बी अँधेरी रात लेकर आने को थी । उसके जाने का गम न जाने क्यो मारे जा रहा था लेकिन आज लगता है सब कुछ ठीक हुआ वो साँझ जिसके बाद अँधेरी रात का अंदेशा था वो साँझ सुबह हो चुकी थी ।
जो मुझे जानते हैं, आज वास्ता उनसे है।
बचपन कब चला गया ठीक ठीक पता नही. जवानी की दस्तक हुई ...ढेर से सपने , निराधार उम्मीदे और ऐसी ही कुछ और चीजे जेहन में जोर मारने लगी। जल्द ही यथार्थ के कड़े धरातल का स्पर्श हुआ । पहले चखे हुऐ खट्टे बेर जानलेवा दर्द बन गये ।
तकलीफ में हर किसी को रस्म की तरह कुछ सहारा मिल ही जाता है ...मेरी झुलसती उम्मीदों को मानो बारिश (वर्षा) ने तर कर दिया। उस सहारे ने मुझे कोमल कर दिया और मेरे धरातल को और भी कठोर।
शायद गलती मेरी थी ...मैंने जिसे झोका समझा वो तेज आंधी थी जिसे तबाही कर जाना ही था, वो गई और मन की वो गर्द भी उड़ा ले गयी जो मेरे जीवन में लम्बी अँधेरी रात लेकर आने को थी । उसके जाने का गम न जाने क्यो मारे जा रहा था लेकिन आज लगता है सब कुछ ठीक हुआ वो साँझ जिसके बाद अँधेरी रात का अंदेशा था वो साँझ सुबह हो चुकी थी ।