मन में एक तूफान है
सब कुछ उड़ाने को
डरता हूँ ये तूफान
न जाने क्या उड़ा ले
क्या दिखा दे ....
कभी कुछ जो सहेजा था
न जाने कब दफन हुआ
कोई तो आकर
दफ्न चीजो को छुपा ले
मुकम्मल मिटा दे .........
बढिया. लिखते रहें.
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1 टिप्पणी:
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