तेरे भीतर मैंने
एक अक्श तराशा है
बेहद नजाकत से
जीने सपनों को
जो टूट चुके
मेरी तलाश के द्वार
हर रोज तराशता हूँ
तेरे भीतर चुपके से
बेहद अपना सा समय
जो बीत गया
बिखर गया
समय के साथ
चाह नहीं
मर्यादाओं की दुर्गन्ध में
जीने उस समय को
तुझसे से दूर
जीना चाहता हूँ
वो समय तेरे ही भीतर.
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