GAJANAN RATHOD
सोमवार, 27 जून 2011
दीवारों के पार
लाजमी है
अब तुम
बारिश से
अपना दामन
बचाती होगी
लेकिन
छुप-छुप कर ही सही
अपनी सांसो को
नम यादों से
भिगाती होगी
हाँ
रिश्तों की जकड़
कैद कर सकती है
तुम्हारी देह
तुम
अपनी रूह
कभी तो
दीवारों के पार
ले जाती होगी
1 टिप्पणी:
Deepak Thakur
ने कहा…
kya baat hai
3:54 am, जून 28, 2011
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