GAJANAN RATHOD
बुधवार, 9 फ़रवरी 2011
स्पर्श... जो हुआ नहीं
तेरा आना
नीरव आकाश में
एक चिड़िया की तरह
और चला जाना
बिना गुनगुनाए
कोई गीत.
और मेरा खो जाना
सपनों में,
तेरे होंठो से
मेरी आत्मा तक,
उस स्पर्श के एहसास में
जो अब तलक हुआ नहीं.
1 टिप्पणी:
SARVESH TIWARI
ने कहा…
bahut khoob
9:40 pm, मार्च 09, 2011
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1 टिप्पणी:
bahut khoob
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