शुक्रवार, 12 मार्च 2010

उमड़-घुमड़


कभी अकेली साँझ मन की खाली कोठी में कुछ गा जाती है,


इस दौड़-भाग में भीड़-भाड़ में याद तुम्हारी आ जाती है।


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हा सच है उनकी आँखे कुछ ज्यादा नम है,


पर ऐसा नहीं की हमें उनके जाने का गम कम है,


शायद वो किफायत से आंसू बहाते रहे अब तक,


और कहते है हमारी आँखों में आंसू कम है.

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